मंदसौर / नीमच /
2027-28 के लिए उपज का मानक बढ़ाकर 900 किलो किया; पात्र किसानों को अधिकतम 0.05 हेक्टेयर यानी 5 आरी के भूखंड पर मिलेगा लाइसेंस
मालवा-मेवाड़ और देश भर के अफीम काश्तकारों के लंबे इंतजार और असमंजस के बाद आखिरकार केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) ने अफीम फसल वर्ष 2026-27 के लिए सीपीएस (CPS) यानी बिना चीरा लगाए पोस्त भूसा उत्पादन हेतु नई अफीम नीति की आधिकारिक अधिसूचना (सं. 02/2026-स्वापक नियंत्रण-1) जारी कर दी है।
नीति की घोषणा में हुई देरी के कारण बुवाई के अनुकूल समय और पट्टों की स्थिति को लेकर किसानों में जो चिंता और असमंजस बना हुआ था, इस अधिसूचना के आने के बाद अब वह पूरी तरह दूर हो गया है।
📋 अफीम नीति 2026-27 (सीपीएस पद्धति) की मुख्य विशेषताएं व प्रावधान:
1. पहली बार 5 वर्षों के लिए ब्लॉक लाइसेंस (2026-27 से 2030-31)
* दीर्घकालिक लाइसेंस: सीपीएस पद्धति से पोस्त भूसा उत्पादन करने वाले पात्र किसानों को इस बार लगातार 5 फसल वर्षों (2026-27 से 2030-31 तक) के लिए लाइसेंस प्रदान किया जाएगा।
* शर्त: लाइसेंस अवधि के दौरान किसान किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि में संलिप्त न पाया जाए।
2. पात्रता और औसत उपज मापदंड (Eligibility)
* पात्रता मापदंड: फसल वर्ष 2025-26 के दौरान सीपीएस पद्धति से खेती करने वाले वे किसान पात्र होंगे, जिन्होंने तौल केंद्र पर औसतन 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर या उससे अधिक पोस्त भूसा सौंपा है।
* कम उपज पर सस्पेंशन: जिन किसानों ने वर्ष 2025-26 में 800 किग्रा/हेक्टेयर से कम पोस्त भूसा दिया था, उनका लाइसेंस 2026-27 के लिए निलंबित रहेगा। हालांकि, वे अगले वर्ष के लिए पात्र बने रहेंगे।
* 2024-25 के निलंबित किसानों की वापसी: फसल वर्ष 2024-25 में 800 किग्रा/हेक्टेयर से कम औसत के कारण निलंबित हुए किसानों को अन्य पात्रता शर्तें पूरी करने पर वर्ष 2026-27 में पुनः लाइसेंस दिया जाएगा।
3. भूखंड का क्षेत्रफल (Plot Size)
* पात्र किसानों को अधिकतम 0.05 हेक्टेयर (5 आरी) के एक ही भूखंड के लिए लाइसेंस दिया जाएगा।
* यह भूखंड एक से अधिक राजस्व खसरा नंबरों में फैला हो सकता है।
* किसान चाहें तो लाइसेंस क्षेत्रफल पूरा करने के लिए दूसरों की जमीन पट्टे (लीज) पर भी ले सकते हैं।
4. भविष्य के लिए पूर्व चेतावनी (वर्ष 2027-28 हेतु)
* बढ़ा हुआ मापदंड: अगले फसल वर्ष (2027-28) में सीपीएस पट्टा बरकरार रखने के लिए किसानों को फसल वर्ष 2026-27 में न्यूनतम 900 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पोस्त भूसा उपज देना अनिवार्य होगा।
* लगातार जुताई पर रोक: जिन किसानों ने फसल वर्ष 2024-25 और 2025-26 में अपनी फसल जुताई कराई थी, यदि वे 2026-27 में भी जुताई करा देते हैं, तो उन्हें 2027-28 के लिए पात्र नहीं माना जाएगा।
5. डिजिटल एवं पारदर्शी प्रक्रिया (Online Portal)
* वेबसाइट पर सूची: सभी पात्र काश्तकारों के नाम सीबीएन की आधिकारिक वेबसाइट (cbn.gov.in) और सीबीएन ऑनलाइन पोर्टल (cbnonline.gov.in) पर जारी किए जाएंगे तथा पंजीकृत मोबाइल/ईमेल पर भी सूचित किया जाएगा।
* ऑनलाइन आवेदन: पात्र किसानों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
* कागजातों से राहत: मौजूदा लाइसेंसधारियों को वे दस्तावेज दोबारा जमा कराने की आवश्यकता नहीं होगी जो विभाग के पास पहले से उपलब्ध हैं।
💡 काश्तकारों के लिए विशेष राहत एवं कानूनी नियम:
* क्षमा योग्य सीमा (Tolerable Limit): यदि वास्तविक बोया गया क्षेत्रफल लाइसेंसशुदा क्षेत्र से 5 प्रतिशत तक अधिक पाया जाता है, तो उसे क्षम्य (माफ) माना जाएगा।
* पास के गांव में भंडारण की सुविधा: यदि किसान का खेत पास के किसी गांव में है, तो उसे अपने निवास वाले गांव में पोस्त भूसा एकत्र करने की अनुमति होगी, बशर्ते दोनों गांवों के बीच निरंतर मानव बस्ती हो।
* भाषा विसंगति: यदि नीति के हिंदी और अंग्रेजी संस्करण के किसी पैरा में कोई अंतर पाया जाता है, तो अंग्रेजी
संस्करण ही सर्वमान्य होगा।



