नीमच।रामेश्वर नागदा. नीमच जिले के अंतर्गत आने वाले नगर परिषद जीरन के पाटीदार समाज की बेटी वंदना (पिता प्रेम सुख सगवारिया ) ने अपनी मेहनत और लगन से आरपीएफ (रेल्वे पुलिस ) पद पर चयनित होकर गांव जीरन क्षेत्र एवं संपूर्ण नीमच जिले का नाम रोशन किया है। जैसे ही यह खबर गांव में पहुंची, पूरे क्षेत्र में हर्ष और गर्व की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों व समाज के लोगों ने वंदना के घर पहुंचकर बधाइयाँ दीं, वहीं सोशल मीडिया पर भी शुभकामनाओं की बाढ़ आ गई। पिता का सपना था पुलिस सेवा में जाने का लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों के कारण वह इसे पूरा नहीं कर पाये। इस सपने को उन्होंने मेरे अंदर देखा और मुझे प्रोत्साहित किया। अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की और आरपीएफ परीक्षा में उत्तीर्ण कर आरपीएफ रेलवे पुलिस आरक्षक बनी। परिणाम आया तो सबसे पहले सूचना भी पिता को दी। यह कहना है कि जिले के छोटे से नगर परिषद जीरन की रहने वाली वंदना सगवारिया का। जिन्होंने आरपीएफ रेलवे परीक्षा में सफलता हासिल की। वंदना का अगला लक्ष्य एएसआई की परीक्षा उत्तीर्ण कर एएसआई बनना है।वंदना परिवार से आरक्षक बनने वाली पहली बेटी होगी।*
यहां तक पहुंचने का सफर कैसा रहा ?-वदना ने बताया कि गांव के जीरन क्षेत्र के प्राथमिक स्कूल से शिक्षा की शुरुआत की और स्नातक की पढ़ाई भी नीमच में शासकीय सीताराम जाजू कॉलेज से की। इसके बाद तैयारी शुरू की। पिछले दो प्रयासों से वह तैयारी कर रही है और अब 3 रें प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की। सपने को पूरा करने के लिए परिवार और सबसे अधिक बहन मनीषा कनक सीमा एवं दादी गीता बाई का सहयोग भी इसमें मिला।*
तैयारी के दौरान मार्गदर्शन किससे लिया और कैसे तैयारी की ?-
-वंदना ने बताया कि पिता प्रेम सुख सगवारिया किसान है और पिता भी खेती किसानी मजदूरी ही करते हैं। माता यशोदा बाई गृहिणी है। चार बहनों में एक भी भाई नहीं है भाई की कमी को पूरा करने के लिए बेटी ने परिश्रम किया और सफलता को प्राप्त किया।वह परिवार की पहली बेटी है जिसने आरपीएफ आरक्षक परीक्षा में सफलता प्राप्त की। उनका कहना है कि परिवार व रिश्तेदारी में कोई अधिकारी नहीं था।लेकिन तैयारी के दौरान जिनका चयन होता गया वह उसके मार्गदर्शक थे। सभी से बात करती थी और अपनी तैयारी को उसी हिसाब से आगे बढ़ाती थी। सफलता में चयनित दोस्तो निकिता शर्मा एवं राहुल राठौर का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा। हर दिन वह 7 से 8 घंटे तक पढ़ाई करती थी।* ने बताया कि वह शुरू से ही संवेदनशील है। ऐसे में ड्यूटी के दौरान भी संवेदनशीलता के साथ ही वह काम करेगी। धरातल (ग्रॉस रूट) पर काम हो और लोगों की मदद हो यह उनकी प्राथमिकता होगी। कानून व्यवस्था बेहतर हो लोगों को सुविधा व लाभ मिले। इसके लिए वह काम करेगी। साथ ही गांव में अन्य बेटियां जो इसकी तैयारी करना चाहती है उन्हें भी वह मार्गदर्शन देगी।*
