एक माह में कई युवाओं ने की आत्महत्या: कोई फंदे पर झूला, किसी ने खाया सल्फास; मरने वालों में सबसे ज्यादा युवा, आखिर किस अवसाद या डर की गिरफ्त में है हमारा समाज..?
नीमच, निप्र। क्या नीमच का युवा समाज अंदर ही अंदर किसी गहरी खामोशी और अवसाद से जूझ रहा है? यह सवाल इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि बीते एक महीने में जिले से आई आत्मघाती कदमों की तस्वीरें न सिर्फ डराने वाली हैं, बल्कि झकझोर देने वाली हैं। किसी का पूरा जीवन आगे पड़ा था, तो कोई अपने परिवार का इकलौता सहारा था। लेकिन एक पल की मायूसी, क्षणिक गुस्सा या अनकहा तनाव पूरी जिंदगी पर भारी पड़ गया।
अलग-अलग थाना क्षेत्रों से सामने आए ये मामले सोचने पर मजबूर करते हैं कि आखिर हमारे युवा किस मानसिक दबाव की गिरफ्त में हैं, जहाँ मौत को गले लगाना उन्हें सबसे आसान रास्ता नजर आ रहा है।
पेश है बीते एक महीने की वो दहला देने वाली दास्तानें और उनके पीछे छिपे सुलगते सवाल—
एक महीने की वो खौफनाक दास्तानें, जिन्होंने पूरे नीमच को झकझोर दिया
- केस 1: रात 2 बजे सूने कमरे में थमी सांसें
- मृतक: इदरीश मंसूरी (40 वर्ष), पिता – सफी
- स्थान: जामा मस्जिद इलाका, नीमच सिटी थाना क्षेत्र
- घटना: बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे इदरीश ने घर के ऊपरी कमरे में फांसी लगा ली। पत्नी जब ढूंढते हुए ऊपर गई तो कमरा अंदर से बंद था। काफी मशक्कत के बाद दरवाजा खोलने पर इदरीश का शव फंदे पर लटका मिला।
केस 2: ड्यूटी पर थी मां, पीछे से नाबालिग बेटी ने लगा ली फांसी
- मृतिका: कविता की नाबालिग पुत्री
- स्थान: उपजेल परिसर का शासकीय आवास, नीमच
- घटना: मंगलवार शाम करीब 6:30 बजे मां उपजेल कार्यालय में अपनी ड्यूटी पर तैनात थीं। घटना के समय नाबालिग घर में अकेली थी। उसकी छोटी बहन जब घर पहुंची, तो उसने अपनी बहन को कमरे में फंदे से लटका देखा।
केस 3: खेत में मिला ट्रैक्टर चालक का शव, शरीर पर चोट के निशान
- मृतक: दयाल सिंह (25 वर्ष), पिता – अज्ञात
- निवासी: ग्राम उगरान (थाना जीरन) | घटनास्थल: सिंगोली रोड स्थित सुला बावजी के पास खेत
- घटना: ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची सिंगोली थाना पुलिस को दयाल सिंह का शव संदिग्ध हालत में मिला। उसके दोनों पैर रस्सी से बंधे थे और शरीर पर चोट के निशान थे, जिससे मामला हत्या और आत्महत्या के बीच उलझा हुआ है।
केस 4: स्कूल परिसर में सल्फास खाया, दोस्त को फोन कर कहा- ‘मैंने जहर खा लिया’
- मृतक: लक्ष्मीलाल उर्फ लाला (35 वर्ष), पिता – चांदमल सेन
- स्थान: ग्राम जमुनिया कला, नीमच सिटी थाना क्षेत्र
- घटना: लक्ष्मीलाल ने अज्ञात कारणों से गांव के ही सरकारी स्कूल परिसर में सल्फास का सेवन कर लिया। जहर खाने के बाद उसने अपने एक दोस्त को फोन पर इसकी सूचना दी। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
केस 5: लापता युवती का जंगल में मिला कंकाल, फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
- मृतिका: ग्राम सालर माला से लापता युवती
- स्थान: गांधी सागर के जंगल, रामपुरा थाना क्षेत्र
- घटना: शनिवार को लापता युवती का कंकाल मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने हत्या की आशंका जताते हुए नीमच-झालावाड़ मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
केस 6: ‘दोस्त, मैं जा रहा हूँ…’ कहकर 12वीं के छात्र ने लगा ली फांसी
- मृतक: पीयूष शर्मा (18 वर्ष), पिता – अमर शर्मा
- स्थान: स्कीम नंबर 9, नीमच
- घटना: शनिवार को 12वीं के छात्र पीयूष ने आत्मघाती कदम उठाने से ठीक पहले अपने दोस्त को फोन किया था। मां नीचे किचन में खाना बना रही थी और पीयूष ऊपर कमरे में पढ़ाई करने की बात कहकर गया था, जहां उसने फांसी लगा ली।
केस 7: सुबह खेत पर गया था युवक, वहां खा ली सल्फास की गोलियां
- मृतक: देवी सिंह (35 वर्ष), पिता – मोहन सिंह बछड़ा
- स्थान: ग्राम पिपलिया रुण्डी, मनासा थाना क्षेत्र
- घटना: बुधवार सुबह देवी सिंह अपने खेत पर गए थे। वहां उन्होंने अज्ञात कारणों के चलते सल्फास की गोलियों का सेवन कर लिया। जिला चिकित्सालय में उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
mpinsighttv अपील व समझाईश: जिंदगी बेहद खूबसूरत है, ‘शॉर्टकट’ मत चुनिए!
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में युवाओं के भीतर धैर्य लगातार कम हो रहा है। करियर का प्रेशर, रिश्तों में कड़वाहट, आर्थिक तंगी या अचानक उपजा कोई डर इंसान की सोचने-समझने की क्षमता को कुछ पलों के लिए ब्लॉक कर देता है। लेकिन याद रखिए, समस्या चाहे कितनी भी बड़ी हो, मौत कभी उसका हल नहीं हो सकती।
युवाओं और आम जन के लिए जरूरी बातें:
बात करिए, दिल का गुबार निकालिए: अगर आप किसी भी मानसिक तनाव, अवसाद या डर से गुजर रहे हैं, तो उसे अपने तक सीमित न रखें। अपने माता-पिता, भाई-बहन या सबसे भरोसेमंद दोस्त से बात करें। कहने से हर बात का रास्ता निकलता है।
माता-पिता बच्चों को ‘वक्त’ दें: पालकों को चाहिए कि वे बच्चों की खामोशी को पहचानें। अगर बच्चा अचानक चिड़चिड़ा हो रहा है, अकेले कमरे में बंद रहता है या कम बात कर रहा है, तो उसे डांटने के बजाय दोस्त बनकर उससे संवाद स्थापित करें।
सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से बाहर आएं: रील और स्क्रीन की झूठी चमक से अपनी असल जिंदगी की तुलना कभी न करें। असफलता जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नया सबक और अनुभव है।
एक पल का ठहराव जरूरी है: जब भी मन में कोई भी गलत या आत्मघाती विचार आए, तो सिर्फ 5 मिनट के लिए रुकें और आंखें बंद करके सोचें कि आपके जाने के बाद आपके माता-पिता और परिवार का क्या होगा। आपका एक गलत कदम पूरे हंसते-खेलते परिवार को जीते-जी मार देता है।
हेल्पलाइन नंबर: यदि आप या आपका कोई परिचित किसी भी तरह के मानसिक तनाव या डिप्रेशन से गुजर रहा है, तो भारत सरकार की फ्री मेंटल हेल्थ हेल्पलाइन ‘किरण’ (KIRAN) के टोल-फ्री नंबर 1800-599-0019 पर संपर्क कर सकते हैं। यहाँ विशेषज्ञ आपकी प
हचान पूरी तरह गुप्त रखकर आपकी मदद करते हैं।

हेल्पलाइन नंबर: यदि आप या आपका कोई परिचित किसी भी तरह के मानसिक तनाव या डिप्रेशन से गुजर रहा है, तो भारत सरकार की फ्री मेंटल हेल्थ हेल्पलाइन ‘किरण’ (KIRAN) के टोल-फ्री नंबर 1800-599-0019 पर संपर्क कर सकते हैं। यहाँ विशेषज्ञ आपकी प