नीमच। सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन बुधवार को जिले में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। जब कलेक्टर हिमांशु चंद्रा खुद ‘टीचर’ बनकर कक्षा में पहुंचे, तो पढ़ाई की असल स्थिति भी सामने आ गई।
रतनगढ़ क्षेत्र के ग्राम कस्मारिया स्थित पीएम श्री विद्यालय के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर सीधे कक्षा आठवीं में पहुंचे। बिना किसी औपचारिकता के उन्होंने बच्चों के बीच बैठकर पढ़ाई का स्तर जांचना शुरू किया। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक ब्लैकबोर्ड की जगह स्कूल में लगे इंटरैक्टिव पैनल का उपयोग किया, जिससे बच्चों की समझ और प्रतिक्रिया को आधुनिक तरीके से परखा जा सके।
कलेक्टर ने पैनल पर गणित के सवाल लिखे और एक-एक कर छात्रों को बुलाकर हल करने के लिए कहा। शुरुआत में कुछ बच्चों ने आत्मविश्वास के साथ सही जवाब दिए, लेकिन जैसे-जैसे सवालों का स्तर बढ़ा, कई छात्र बुनियादी अवधारणाओं में ही अटकते नजर आए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि कई विद्यार्थी विषय को गहराई से समझने के बजाय रटकर जवाब देने की आदत पर निर्भर हैं।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने बच्चों से सीधे संवाद भी किया। उन्होंने सवाल-जवाब के जरिए यह समझने की कोशिश की कि छात्र पढ़ाई को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं। बच्चों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा— “अगर मन लगाकर पढ़ाई करोगे, तो आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।”
हालांकि, जब पढ़ाई के स्तर में कमी सामने आई, तो कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने मौके पर ही गणित शिक्षक को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिक्षण गुणवत्ता में तुरंत सुधार किया जाए। साथ ही विद्यालय के प्राचार्य और संबंधित शिक्षक के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए।
कलेक्टर के इस औचक निरीक्षण से स्कूल स्टाफ में हड़कंप की स्थिति रही। प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ यह संदेश भी साफ तौर पर दिया गया कि अब सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह कार्रवाई न सिर्फ संबंधित स्कूल के लिए, बल्कि जिले के अन्य शासकीय विद्यालयों के लिए भी एक चेतावनी मानी जा रही है कि शिक्षा के स्तर में सुधार लाना अब प्राथमिकता में है और इसके लिए जवाबदेही तय की
जाएगी।
