
कपास और सरसों की आड़ में उग रही थी 1 करोड़ से अधिक की फसल, CBN की निगरानी व्यवस्था पर उठे तीखे सवाल
नीमच। मालवा के अफीम बेल्ट कहे जाने वाले नीमच जिले में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ पुलिस ने तकनीक के सहारे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। रतनगढ़ और सिंगोली थाना पुलिस ने ड्रोन कैमरों की मदद से उन खेतों का खुलासा किया, जहां कपास और सरसों की फसल के बीच छिपाकर अवैध अफीम की खेती की जा रही थी। इस संयुक्त कार्रवाई में 1 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अफीम की फसल जब्त की गई है।इस कार्रवाई ने जहां पुलिस की सक्रियता और तकनीकी दक्षता को साबित किया है, वहीं केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) के दिल्ली मुख्यालय और ग्वालियर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय की निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
रतनगढ़: ड्रोन से खुला ‘काले सोने’ का राज-जावद क्षेत्र के ग्राम लुहारिया जाट में पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक किसान कपास की फसल के बीच अवैध रूप से अफीम उगा रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए रतनगढ़ थाना प्रभारी मनोज सिंह जादौन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने पहले ड्रोन से संदिग्ध खेत की सर्चिंग की।ड्रोन फुटेज में कपास के पौधों के बीच अलग प्रकार की कतारें और रंगत दिखाई दी। मौके पर पहुंचकर जब पुलिस ने खेत की जांच की तो पाया कि कपास की आड़ में बड़ी मात्रा में अफीम के पौधे लगाए गए थे। गिनती और तौल के बाद कुल 11,600 हरे अफीम के पौधे बरामद हुए, जिनका वजन 9.76 क्विंटल (करीब 976 किलोग्राम) निकला। जब्त फसल की अनुमानित कीमत 97 लाख 60 हजार रुपये आंकी गई।इस मामले में आरोपी हीरालाल पिता घिसालाल माली (43) को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
सिंगोली: सरसों के बीच छिपी अवैध खेती
रतनगढ़ की कार्रवाई के अगले ही दिन सिंगोली थाना क्षेत्र के ग्राम अथवा बुजुर्ग में भी इसी तरह का मामला सामने आया। यहां पुलिस को सूचना मिली कि सरसों की फसल के बीच अफीम की खेती की जा रही है। थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार वर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने खेत की जांच की।मौके पर सरसों के पौधों के बीच छिपाकर उगाए गए अफीम के पौधे पाए गए। विधिवत तौल में 78.920 किलोग्राम हरे और गीले अफीम के पौधे बरामद हुए, जिनकी अनुमानित कीमत 7 लाख 90 हजार रुपये बताई गई है। आरोपी रतनलाल पिता कन्हैयालाल बलाई (36) को गिरफ्तार कर लिया गया।दोनों ही मामलों में पुलिस ने जब्त मशरूका को सील कर विधि अनुसार कार्रवाई शुरू कर दी है।
CBN की निगरानी पर उठे सवाल-नीमच और मंदसौर क्षेत्र देश के उन चुनिंदा इलाकों में आते हैं, जहां वैध रूप से अफीम की खेती लाइसेंस के तहत होती है। इस पूरी व्यवस्था की निगरानी केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) के अधीन है, जिसका क्षेत्रीय कार्यालय ग्वालियर में स्थित है और नीतिगत नियंत्रण दिल्ली मुख्यालय से होता है।ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब पुलिस ड्रोन तकनीक से अवैध फसल का पता लगा सकती है, तो विभागीय फील्ड स्टाफ, नपती दल और खुफिया तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? क्या यह केवल स्थानीय स्तर की चूक है या निगरानी प्रणाली में व्यापक खामियां हैं?विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में अवैध पौधों का तैयार होना बिना लंबे समय तक निगरानी की कमी के संभव नहीं है। यदि समय-समय पर खेतों की सघन जांच और तकनीकी सर्वे किया जाता, तो यह स्थिति शायद उत्पन्न ही नहीं होती।
पुलिस की सक्रियता से बढ़ा मान -डीआईजी निर्देशन में हुई इस कार्रवाई ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ सख्ती जारी रहेगी। रतनगढ़ और सिंगोली थाना पुलिस की तत्परता और ड्रोन तकनीक का उपयोग सराहनीय माना जा रहा है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिले में अवैध अफीम और अन्य मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। साथ ही आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कहीं इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।
जवाबदेही तय करने की मांग-अब जिले में यह बहस तेज हो गई है कि क्या नारकोटिक्स विभाग को अपनी निगरानी व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए? क्या ड्रोन सर्विलांस और आधुनिक तकनीक को नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाएगा?नीमच पुलिस की इस ‘ड्रोन स्ट्राइक’ ने न केवल अवैध खेती का भंडाफोड़ किया है, बल्कि विभागीय जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी नई चर्चा छेड़ दी है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस कार्रवाई के बाद निगरानी व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाते हैं और क्या मालवा क्षेत्र में अवैध अफीम के नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार हो पाता है।

