बद्री विशाल मंदिर की जमीन पर कॉलोनी, बड़े नेताओं की तस्वीरों से प्रचार… पुलिस ने लिखवाया माफीनामा!
नीमच जिले की मनासा तहसील इन दिनों दोहरे विवाद के कारण सुर्खियों में है। एक ओर ‘नकली भतीजा’ कांड ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है, तो दूसरी ओर मनासा के प्रसिद्ध की जमीन पर कॉलोनी काटे जाने के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।आरोप है कि मंदसौर के कथित भू-माफिया और कॉलोनाइजरों ने भाजपा नेताओं से सांठगांठ कर मंदिर से जुड़ी जमीन को अपने नाम करवाया और फिर उसी जमीन पर ‘खाटू धाम कॉलोनी’ नाम से प्लॉट बेचना शुरू कर दिया। कॉलोनी के प्रचार में मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम, सांसद और अन्य जनप्रतिनिधियों की तस्वीरें बड़े-बड़े फ्लेक्स और होर्डिंग्स पर लगाई गईं, जिससे यह संदेश दिया गया कि परियोजना को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है।
ऊपर तक पहुंच’ दिखाकर बेचे गए प्लॉट?
6 से 8 फरवरी तक तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन, मंदिर लोकार्पण, 151 कन्या पूजन और भंडारे की घोषणा कर माहौल तैयार किया गया। प्रचार में मुख्यमंत्री के भाई नारायण यादव के आने की बात कही गई। जब वे नहीं पहुंचे तो मंच पर एक युवक को उनका बेटा ‘अभय यादव’ बताकर सम्मानित किया गया। बाद में पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि असली अभय यादव उस दिन ग्वालियर में थे।
तस्वीरें वायरल होते ही मामला तूल पकड़ गया। मनासा थाना प्रभारी ने जांच शुरू की और कॉलोनाइजरों को तलब कर पूछताछ की। अनुमति, आमंत्रण और प्रचार सामग्री के संबंध में स्पष्ट जवाब नहीं मिलने पर आयोजकों से लिखित माफीनामा लिया गया। फिलहाल पुलिस उस व्यक्ति की तलाश में है जिसने कथित तौर पर नकली अभय को भेजा।
मंदिर जमीन पर कॉलोनी? बड़ा सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि यदि जमीन मंदिर से जुड़ी थी, तो उस पर कॉलोनी कैसे विकसित हो गई? प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार लगातार अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई के निर्देश दे रही है। ऐसे में मनासा में यह कॉलोनी किन अनुमतियों के आधार पर विकसित हुई—यह जांच का विषय बन गया है।स्थानीय सूत्रों का कहना है कि विभागीय अनुमतियों में सहजता लाने और ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए बड़े नेताओं की तस्वीरों का उपयोग किया गया। जिस दिन शिकायतें सोशल मीडिया के माध्यम से ऊपर तक पहुंचीं, उसी दिन कई होर्डिंग्स और फ्लेक्स अचानक हटवा दिए गए।जिला पंचायत सदस्य मनीष पोरवाल ने आरोप लगाया कि बद्री विशाल मंदिर की जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा कर प्लॉट बेचे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला है और यदि प्रशासन ने निष्पक्ष जांच नहीं की तो वरिष्ठ विधि सलाहकारों से चर्चा कर जनहित याचिका दायर की जाएगी। उनका कहना है कि बड़े नामों और नेताओं की तस्वीरों का उपयोग कर प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की गई।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
फिलहाल पुलिस माफीनामे के आधार पर आगे की कार्रवाई की दिशा तय कर रही है। यदि जांच में साजिश, धोखाधड़ी, जनप्रतिनिधियों की छवि के दुरुपयोग या अवैध कॉलोनी काटने के प्रमाण मिलते हैं, तो मामला गंभीर धाराओं तक पहुंच सकता है।मनासा का यह प्रकरण केवल ‘नकली भतीजा’ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या सत्ता और धार्मिक आस्था के नाम का इस्तेमाल कर जमीन और प्लॉट का कारोबार किया जा सकता है?अब नजर प्रशासनिक जांच पर है—क्या मंदिर की जमीन की वास्तविक स्थिति सामने आएगी? क्या कॉलोनी की वैधता की जांच होगी? और क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?


मनासा में उठे ये सवाल केवल स्थानीय नहीं, बल्कि प्रदेश की नीति और शासन व्यवस्था की साख से भी जुड़े हुए हैं।
