तीसवें रंग-रंगीले फाग महोत्सव में उमड़ा आस्था का विराट जनसैलाब, श्रद्धा और उल्लास से सराबोर हुआ 
नीमच। धर्म, संस्कृति और आस्था के अद्भुत संगम का साक्षी बना नीमच नगर गुरुवार 27 फरवरी को, जब खाटू श्याम को समर्पित तीसवां रंग-रंगीला फाग महोत्सव भव्य शोभायात्रा के साथ प्रारंभ हुआ। पूरा शहर भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। “हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा” के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा और श्रद्धालुओं का ऐसा सैलाब उमड़ा मानो पूरा नगर एक विशाल दरबार में परिवर्तित हो गया हो।कार्यक्रम का शुभारंभ नरसिंह मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चार के साथ हुआ। इसके पश्चात शाम 5 बजे घंटाघर से आरती के बाद भव्य शोभायात्रा प्रारंभ हुई। दिव्य रथ में अलौकिक श्रृंगार से सुसज्जित खाटू नरेश बाबा श्याम नगर भ्रमण पर निकले और हजारों श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। रथ को शहनाई, ढोल-नगाड़ों की विशेष आकृति में सजाया गया था, जो इस वर्ष की थीम का केंद्र रहा। जैसे ही रथ आगे बढ़ा, श्रद्धालु पुष्पवर्षा करते हुए बाबा के जयकारे लगाते रहे।
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विद्युत सज्जा से दुल्हन सा सजा शहर-शोभायात्रा मार्ग को आकर्षक विद्युत रोशनी, रंग-बिरंगी झालरों, लाल-पीली-नीली छतरियों और झाड़ सजावट से सुसज्जित किया गया था। रात होते-होते पूरा मार्ग प्रकाशमय हो उठा और ऐसा प्रतीत हुआ मानो नगर किसी दिव्य उत्सव की गोद में समा गया हो। मुख्य मार्गों, चौक-चौराहों और बाजार क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाओं, बच्चों और युवाओं में विशेष उत्साह देखा गया।
झांकियों और प्रस्तुतियों ने मोहा मन-शोभायात्रा में इस वर्ष विशेष आकर्षण राधा-कृष्ण के महारास पर आधारित चलित झांकी रही, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात कलाकारों ने जीवंत प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों की भाव-भंगिमाओं और नृत्य ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।पहली बार कर्नाटक से आई विशेष सांस्कृतिक झांकी ने भी सभी का ध्यान आकर्षित किया। दक्षिण भारतीय संस्कृति की झलक ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। विंटेज कार में सुसज्जित आधुनिक शिव-पार्वती और राधा-कृष्ण की झलक देखने के लिए लोगों में विशेष उत्सुकता रही।महिषासुर मर्दिनी माता के नौ अवतारों द्वारा राक्षस वध का जीवंत मंचन अत्यंत भावपूर्ण रहा। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को देवी शक्ति के प्रति श्रद्धा से भर दिया। वहीं छत्रपति शिवाजी के विशाल कांसे से निर्मित टंकार घंटा भी प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहा, जिसकी गूंज से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
महाराष्ट्र, दिल्ली और नासिक की झलक-महाराष्ट्र और दिल्ली से आई आकर्षक झांकियों ने शोभायात्रा को और भव्य बना दिया। नासिक की प्रसिद्ध ढोल-चंग पार्टी ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज से पूरे मार्ग को उत्साह से भर दिया। ढोल की थाप पर युवाओं का उत्साह देखते ही बनता था।मालवा के प्रसिद्ध बैंड ने भक्ति संगीत की मनमोहक धुनों से श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। पिछले 60 वर्षों से परंपरागत रूप से नवीन बाबू सैनी द्वारा श्रृंगारित शिवजी की झांकियां भी विशेष आकर्षण रहीं, जिन्होंने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
फूलों की होली और पुष्पवर्षा-यात्रा के दौरान जगह-जगह फूलों की होली खेली गई। पुष्पवर्षा से पूरा वातावरण सुगंधित हो उठा। लायंस क्लब, पूज्य सिंधी पंचायत, पटेल चाल बिहारगंज मित्र मंडल सहित अनेक सामाजिक संगठनों ने मार्ग में भव्य दरबार सजाकर बाबा का आत्मीय स्वागत किया। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और शीतल पेय की व्यवस्था की गई।
सुरक्षा और व्यवस्थाएं-आयोजन को सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन और पुलिस की विशेष व्यवस्था रही। यातायात नियंत्रण, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा। स्वयंसेवकों ने भी श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन प्रदान किया।
आस्था, एकता और संस्कृति का संगम
यह शोभायात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनकर उभरी। विभिन्न समाजों और वर्गों के लोगों ने मिलकर आयोजन को सफल बनाया। नगर में भाईचारे और सहयोग की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।जैसे-जैसे रथ आगे बढ़ता गया, श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंचता गया। भक्ति गीतों, जयकारों और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच नीमच नगर श्रद्धा के सागर में डूबा नजर आया।तीसवें रंग-रंगीले फाग महोत्सव की यह भव्य शुरुआत आने वाले दिनों में होने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक शानदार प्रस्तावना बन गई है। बाबा के दरबार की दिव्यता और भक्तों की आस्था ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।नीमच की धरती पर निकली यह ऐतिहासिक शोभायात्रा लंबे समय तक श्रद्धालुओं के हृदय में स्मृतियों के रूप में जीवित रहेगी।
