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नीमच पुलिस लाइन से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे पुलिस महकमे को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस विभाग के भीतर चल रहे कथित भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और मानसिक प्रताड़ना से आहत होकर पुलिस लाइन में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल होशियार सिंह (50) ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत से पहले उन्होंने चार पन्नों का सुसाइड नोट लिखा, जिसमें पुलिस लाइन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
घटना रविवार दोपहर की बताई जा रही है। जहर खाने के बाद भी होशियार सिंह हिम्मत जुटाकर खुद कंट्रोल रूम पहुंचे और वहां मौजूद स्टाफ को जहर खाने की जानकारी दी। इसके बाद उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत लगातार बिगड़ती गई और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
सुसाइड नोट में फूटा दर्द, सिस्टम पर लगाए गंभीर आरोप-मौत से पहले लिखे गए चार पन्नों के सुसाइड नोट में होशियार सिंह ने बेहद पीड़ा भरे शब्दों में लिखा है कि नीमच पुलिस लाइन में ईमानदारी से नौकरी करना लगभग असंभव हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि लाइन में ड्यूटी, रोजनामचा और तैनाती जैसे काम भी बिना पैसे दिए नहीं होते।नोट में लिखा गया है कि पुलिस लाइन में सब कुछ बिक रहा है। जो कर्मचारी पैसे देता है, उसे अच्छी और सुविधाजनक ड्यूटी मिलती है, जबकि जो पैसे नहीं देता, उसे जानबूझकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।
आरआई और हेड कॉन्स्टेबल पर सीधा आरोप-सुसाइड नोट में होशियार सिंह ने रक्षित निरीक्षक (आरआई) विक्रम सिंह भदौरिया और हेड कॉन्स्टेबल प्रणव तिवारी के नाम साफ-साफ लिखे हैं। उन्होंने लिखा है कि प्रणव तिवारी कर्मचारियों से पैसे लेकर ड्यूटी लगाता है और यह सब आरआई की जानकारी और संरक्षण में चलता है।नोट में यह भी लिखा गया है कि विरोध करने पर कर्मचारियों को बड़े अधिकारियों के नाम से डराया जाता था और कहा जाता था कि “ऊपर तक सब सेट है, कोई कुछ नहीं कर सकता।”
ट्रेजरी गार्ड ड्यूटी में हजारों की वसूली का आरोप-सुसाइड नोट में ट्रेजरी गार्ड और पुलिस लाइन की ड्यूटी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। होशियार सिंह ने लिखा है कि इन ड्यूटियों के लिए कर्मचारियों से 5 हजार से लेकर 10 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की जाती है।उन्होंने मांग की है कि इन नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह सामने आ सके कि किन-किन कर्मचारियों से कितनी राशि वसूली गई।
पुलिस को इतना मत बेचो कि ईमानदार आदमी नौकरी ही न कर पाए”- नोट में लिखी गई पंक्तियां सिस्टम पर करारा प्रहार करती हैं। होशियार सिंह ने लिखा है—“महोदय, पुलिस को इतना भी मत बेचो कि एक ईमानदार आदमी नौकरी ही न कर पाए। मैं बहुत थक चुका हूं और टूट चुका हूं।”उन्होंने यह भी लिखा कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।
डीजीपी, डीआईजी और से लगाई आखिरी गुहार
सुसाइड नोट में होशियार सिंह ने डीजीपी, डीआईजी और एसपी से अपील करते हुए लिखा है कि यदि पुलिस विभाग में यही हालात रहेंगे, तो ईमानदार कर्मचारियों के पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।उन्होंने लिखा कि उनकी मौत के बाद भी अगर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो पुलिस लाइन में चल रहा पूरा खेल सामने आ सकता है।
पांच दिन से छुट्टी पर थे, सोमवार को जॉइन करनी थी ड्यूटी
परिजनों के अनुसार होशियार सिंह पिछले पांच दिनों से छुट्टी पर थे और सोमवार को उन्हें वापस ड्यूटी जॉइन करनी थी, लेकिन उससे पहले ही उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठा लिया। परिजनों का कहना है कि वे काफी समय से मानसिक तनाव में थे।
महकमे में हड़कंप, जांच की बात
इस घटना के सामने आने के बाद नीमच पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। सुसाइड नोट वायरल होने के बाद मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल पुलिस विभाग की ओर से मामले की जांच की बात कही जा रही है।वहीं आम जनता के बीच इस घटना ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वही सवाल यह भी की जिले में लंबे समय से पुलिस अधिकारियों की पद स्थापना है जिनकी तबादला भीनहीं हो रहे इसके चलते लंबे समय पुलिस व्यवस्था बिगड़ी हुई है।
