भोपाल/नीमच। मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रश्नकाल में नीमच, मंदसौर और रतलाम जिले में निवासरत बांछड़ा समाज की समस्याओं का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। दिलीप सिंह परिहार ने सरकार से पूछा कि मध्य प्रदेश में बांछड़ा समाज को किस जाति वर्ग का दर्जा प्राप्त है और उनकी महिलाओं व बच्चों को देह व्यापार जैसे कार्यों से रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।विधायक परिहार ने यह भी सवाल किया कि लक्ष्मी योजना के अंतर्गत इस समाज की कितनी महिलाओं को लाभ दिया गया है। उन्होंने कहा कि समाज की कई लड़कियों के जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे, जिसके कारण वे शासकीय योजनाओं से वंचित रह जाती हैं।इस पर जवाब देते हुए जनजातीय कार्य मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा कि संबंधित विषय महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ा है। उन्होंने जानकारी दी कि—
नीमच में 433 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 347 जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए।
मंदसौर में 107 आवेदन में से 93 प्रमाण पत्र बनाए गए।
रतलाम में 110 आवेदन में से 107 प्रमाण पत्र जारी हुए।
वहीं, भाजपा विधायक राजेंद्र पांडे ने भी चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि बांछड़ा समाज सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा है, इसलिए इनके शिक्षा व समग्र विकास के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि जाबालि योजना के अंतर्गत आवेदन करने पर सरकार को इस समाज को अधिक से अधिक सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए।विधानसभा में गूंजा बांछड़ा समाज का दर्द
जाति प्रमाण पत्र, पुनर्वास और बेटियों के भविष्य पर सरकार से जवाब-तलबविधानसभा में उठे इस मुद्दे के बाद अब नजर इस बात पर है कि सरकार बांछड़ा समाज की महिलाओं और बच्चों के पुनर्वास, शिक्षा और सामाजिक उत्थान के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।
