नई दिल्ली। 2022-23 की दिल्ली एक्साइज पॉलिसी से जुड़े बहुचर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल, वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और पूर्व आबकारी आयुक्त कुलदीप सिंह को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि केवल आरोप पर्याप्त नहीं हैं, उन्हें साबित करने के लिए ठोस और पर्याप्त सबूत जरूरी हैं।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “सिर्फ दावे काफी नहीं”-अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए साक्ष्य कमजोर और अपर्याप्त हैं। कोर्ट ने कहा कि जब किसी संवैधानिक या सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए जाते हैं, तो उन्हें स्थापित करने के लिए मजबूत सामग्री होना अनिवार्य है।
कोर्ट के अनुसार, दाखिल की गई चार्जशीट में कई खामियां थीं और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इसी आधार पर राहत दी गई।सबसे पहले अदालत ने पूर्व आबकारी आयुक्त कुलदीप सिंह को बरी किया, इसके बाद मनीष सिसोदिया और अंत में अरविंद केजरीवाल को भी आरोपों से मुक्त कर दिया।
CBI और ED की जांच
यह मामला 2022-23 की दिल्ली एक्साइज पॉलिसी से जुड़ा है। इसी आधार पर Central Bureau of Investigation (CBI) ने केस दर्ज किया था। बाद में Enforcement Directorate (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में अलग से मामला दर्ज किया।
मामले में आम आदमी पार्टी के कई नेता जेल भी गए थे। कई बार जमानत याचिकाएं खारिज हुईं, हालांकि बाद में राहत मिली।
एजेंसी हाईकोर्ट जाएगी-फैसले के बाद जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि वह आदेश से संतुष्ट नहीं है और इसे हाईकोर्ट में चुनौती देगी। सीबीआई के वकीलों ने कहा है कि आदेश का विस्तृत अध्ययन करने के बाद ऊपरी अदालत में अपील दायर की जाएगी।फिलहाल अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की ओर से इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक हलकों में हलचल-कोर्ट का यह फैसला आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में आए इस निर्णय के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।


