नई दिल्ली/कोलकाता।
पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर इंडिया टुडे–सीवोटर के ताज़ा ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि राज्य में मुकाबला भले ही कड़ा हो रहा हो, लेकिन बढ़त अब भी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पास है। सर्वे के मुताबिक अगर आज लोकसभा चुनाव होते हैं तो बंगाल की 42 सीटों में से करीब 28 सीटों पर TMC जीत दर्ज कर सकती है, जबकि भाजपा (BJP) को लगभग 14 सीटें मिलने का अनुमान है।यह आंकड़े बताते हैं कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी राज्य में अब भी सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत बनी हुई है। केंद्र सरकार और भाजपा के आक्रामक प्रचार के बावजूद, बंगाल के मतदाता फिलहाल TMC पर भरोसा जताते दिखाई दे रहे हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों और शहरी गरीब तबकों में तृणमूल की पकड़ अभी कमजोर नहीं पड़ी है।हालांकि सर्वे यह भी संकेत देता है कि भाजपा ने पिछली तुलना में अपनी स्थिति कुछ हद तक मजबूत की है। 2019 और 2024 के चुनावों के बाद भाजपा का वोट शेयर स्थिर बना हुआ है और कुछ क्षेत्रों में उसे बढ़त भी मिलती दिख रही है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में TMC के लिए चुनौती पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।कांग्रेस और वाम दलों की बात करें तो सर्वे में उनकी भूमिका सीमित नजर आती है। राज्य की राजनीति लगभग पूरी तरह TMC बनाम BJP के द्वंद्व में सिमट चुकी है। तीसरी ताकत के तौर पर उभरने में अन्य दल फिलहाल नाकाम दिख रहे हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सर्वे ममता बनर्जी के लिए राहत की खबर है, लेकिन पूरी तरह निश्चिंत होने का कारण नहीं। दूसरी ओर भाजपा के लिए यह संकेत है कि संघर्ष जारी रखने पर वह अपनी सीटें और बढ़ा सकती है कुल मिलाकर, अगर आज चुनाव हुए तो बंगाल की बाज़ी TMC के नाम जाती दिख रही है, लेकिन सियासी लड़ाई अब भी दिलचस्प बनी।
पश्चिम बंगाल की राजनीति लंबे समय से भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने बीते वर्षों में राज्य में भाजपा का आधार मजबूत करने के लिए लगातार दौरे, रैलियां और संगठनात्मक बदलाव किए, लेकिन इसके बावजूद तृणमूल कांग्रेस का किला अब तक पूरी तरह नहीं गिर पाया है। इंडिया टुडे–सीवोटर के ताज़ा ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे के आंकड़े भी इसी सियासी हकीकत की पुष्टि करते हैं।
सर्वे के मुताबिक अगर आज लोकसभा चुनाव होते हैं तो बंगाल की 42 सीटों में से करीब 28 सीटों पर TMC की जीत का अनुमान है, जबकि भाजपा को लगभग 14 सीटें मिल सकती हैं। यानी भाजपा की मौजूदगी मजबूत जरूर हुई है, लेकिन सत्ता की चाबी अब भी ममता बनर्जी के हाथ में दिखाई देती है।
भाजपा की रणनीति का एक अहम हिस्सा केंद्र की एजेंसियों, खासकर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की कार्रवाई भी रही है। तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं पर भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में ईडी की जांच और छापेमारी ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बताती है, जबकि ममता बनर्जी और TMC इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार देती रही हैं।
ममता बनर्जी ने हर मंच से यह संदेश देने की कोशिश की है कि केंद्र सरकार एजेंसियों के जरिए चुनी हुई राज्य सरकार को कमजोर करना चाहती है। यही वजह है कि ईडी की कार्रवाई का असर उल्टा भी पड़ता नजर आ रहा है और कई इलाकों में TMC को सहानुभूति का राजनीतिक लाभ मिलता दिख रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी–शाह की जोड़ी बंगाल में भाजपा को मजबूत करने में कामयाब तो हुई है, लेकिन TMC की जमीनी पकड़, क्षेत्रीय पहचान और ममता की आक्रामक राजनीति अब भी भारी पड़ रही है।
कुल मिलाकर, भाजपा पूरी ताकत से बंगाल का किला गिराने में जुटी है, लेकिन मौजूदा हालात में सर्वे यही संकेत देता है कि लड़ाई कड़ी होने के बावजूद बढ़त अभी भी तृणमूल कांग्रेस के पास बनी हुई है।
